चतुर दास जी महाराज, बुटाटी

मंदिर लुणसरा के पास
चतुर दास जी महाराज, बुटाटी
इतिहास

चतुर दास जी महाराज, बुटाटी — इतिहास और महिमा

बुटाटी धाम नागौर ज़िले की डेगाना तहसील के बुटाटी गाँव में, नागौर–अजमेर मार्ग पर स्थित है। यह सिद्ध संत चतुरदास जी महाराज की समाधि है, जो चारण परिवार में जन्मे थे और लगभग 500–600 वर्ष पहले यहाँ रहे।

स्थानीय परंपरा के अनुसार समाधि-स्थल लगभग 1600 ई. का है। गाँव का नाम बूरा लाल शर्मा (दायमा) से जुड़ा माना जाता है; बाद में ठाकुर भोम सिंह के समय यह “भोम सिंह की बुटाटी” कहलाया।

महिमा और आस्था

श्रद्धालुओं की आस्था है कि लकवे (पैरालिसिस) से पीड़ित लोग यहाँ 7 दिन रहकर सप्त परिक्रमा करें — सुबह की आरती के बाद बाहर एक परिक्रमा और शाम की आरती के बाद अंदर एक परिक्रमा — और हवन कुंड की भभूत लगाएँ, तो आराम मिलता है। देशभर से हज़ारों लोग आते हैं।

यह आस्था का विषय है — लकवे के इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह और दवा भी ज़रूर लें।

स्रोत: हिन्दी विकिपीडिया: बुटाटी धाम · अमर उजाला · ETV भारत (2020) · butatidham.org

जानकारी

मेला, आरती और यात्रा

मेला
हर माह शुक्ल पक्ष की एकादशी–द्वादशी; बड़े मेले वैशाख, भाद्रपद और माघ में
आरती
सुबह लगभग 5:30, शाम लगभग 6:30
ठहरना
अधिकतम 7 दिन, पंजीकरण के साथ; ट्रस्ट की ओर से कमरे, बिस्तर, राशन, बर्तन, पानी निःशुल्क; व्हीलचेयर उपलब्ध
पहुँच
नागौर से लगभग 50 किमी; नज़दीकी रेलवे स्टेशन मेड़ता रोड

वीडियो

बुटाटी धाम दर्शन — संत श्री चतुरदास जी महाराज

VLOG WITH JODHPURI LADKA

बुटाटी धाम की पूरी प्रक्रिया — परिक्रमा, आरती, ठहरना

Mohit Jangid Butati Dham

बुटाटी धाम — आस्था का केंद्र

Rural Tales