दादू द्वारा

मंदिर लुणसरा
लोकदेवता

संत दादू दयाल और दादूद्वारा

दादू दयाल (1544–1603) निर्गुण भक्ति के संत थे। उन्होंने निराकार ईश्वर की भक्ति सिखाई और कर्मकांड, मूर्तिपूजा और जात-पाँत का विरोध किया। उनकी लगभग 5,000 वाणियाँ शिष्य रज्जब ने “दादू अनुभव वाणी” में संकलित कीं।

दादू पंथ के मंदिर-आश्रम “दादूद्वारा” कहलाते हैं। जयपुर के पास नराणा पंथ की मुख्य गद्दी है, जहाँ फाल्गुन में मेला भरता है। लुणसरा के दादूद्वारा में भागवत कथा जैसे आयोजन होते हैं।

स्रोत: Wikipedia: Dadu Dayal

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श्रीमद् भागवत कथा, दादूद्वारा लुणसरा — दिन 5 (महंत श्री जानकीदास जी महाराज)

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श्रीमद् भागवत कथा, दादूद्वारा लुणसरा — दिन 6

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