पाबूजी महाराज मंदिर

मंदिर लुणसरा
लोकदेवता

पाबूजी राठौड़

पाबूजी मारवाड़ के राठौड़ लोकनायक हैं। कथा है कि उन्होंने देवल चारणी से केसर कालमी घोड़ी ली और उसकी गायों की रक्षा का वचन दिया। जिंदराव खींची ने गायें लूटीं तो पाबूजी अपने विवाह के फेरे बीच में छोड़कर लड़ने गए और वीरगति पाई।

माना जाता है कि वे राजस्थान में पहली बार ऊँट लाए, इसलिए रेबारी-राइका समाज उन्हें ऊँटों के रक्षक के रूप में पूजता है। भोपे रात भर “पाबूजी की फड़” बाँचते हैं; कोलू (फलोदी) उनका प्रमुख स्थान है।

स्रोत: Wikipedia: Pabuji · Wikipedia: Pabuji Ki Phad

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